स्वरूप :-
- आकाश में रहने वाला
- सर्व अलंकारों से युक्त
- लोह समान वर्ण
- अधो मुख व तीक्ष्ण मुखी
- भयंकर दर्शन वाली
- लंबा शरीर
- पिंगल नेत्र
- शंकुवत लंबे कर्ण
ग्रह का दूध पर प्रभाव :-
दूध का स्वाद कटु, तिक्त हो जाता है।
आक्रमण का समय :-
6 दिन, 6 थे महीने या 6 थे वर्ष में बालक को ग्रहण करती है।
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लक्षण :-
- अंगो का स्थिल होना
- भय से घबराना
- पक्षियों के मांस जैसी गंध
- अतिसार
- मुख व गुद पाक
- ज्वर
- रात को संधियों पर छाले होते है, दिन में चले जाते है
- शरीर पर स्त्राव युक्त व्रण होना
- दाह – पाक युक्त
- जिह्वा व तालू पर भी
- दाह – पाक युक्त
अरिष्ट लक्षण :-
- स्वपन में मास पांक्षी दिखाई दे तब।
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चिकित्सा :-
- गंगा जल, लहसुन, गूगल, सांप की कांचली, नीम के पत्ते,घृत से धूप करे
- निम्न मंत्र का जाप करे व 4 थे दिन ब्रह्मनो को भोजन करवाए
- ॐ नमो नारायणाय चूर्णय चूर्णय हन हन स्वाहा।।
- पिठी की पुतली बनाए और सफेद पुष्प, रक्त पुष्प, पीला पुष्प, चंदन, नागर पान, 10 दीपक, 10 स्वस्तिक, 10 मुष्टिक, 10 बड का दूध, जमब्दिका मचछली का मांस, मदिरा, अग्नि दिशा में दिन के मध्य में बलि दे व जल से स्नान करे।
- शतावरी, इनारून, नाग वंदन, दोनों भत कटेया, लक्ष्मण, सहदेई को बच्चे के गले में धारण करना चाहिए
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रक्षा पाठ :-
बालक को स्नान करवाके निम्न पाठ पढ़ना चाहिए :-
अन्तरिक्षचरा देवी सर्वालङ्कारभूषिता । अधोमुखी सूक्ष्मतुण्डा शकुनी ते प्रसीदतु ॥ दुर्दर्शना महामाया पिङ्गाङ्गी भैरवस्वरा । लम्बोदरी शङ्कुकर्णी शकुनी ते प्रसीदतु ॥ ( भाव प्रकाश मध्यम 71 बाल रोग )
अर्थ :- आकाश में विचरण करने वाली, सम्पूर्ण आभूषणों से सुशोभित, अधोमुखी तथा सूक्ष्म मुखवाली शकुनी देवी तुम्हारे ऊपर प्रसन्न हों। भयङ्कर दर्शनवाली, बड़े शरीर वाली, पीले वर्णवाली, भयङ्कर स्वर वाली, लम्बे पेट वाली तथा शंकु की भाँति कान वाली शकुनी देवी तुम्हारे ऊपर प्रसन्न हो।

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