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Ras Shastra Syllabus

धातु (Metal)

निरुक्ति:- “वलीपलितखालित्य कार्श्याबल्यजरामयान्। निवार्य दधते देहं नृणां तद्धातवो मताः।।” (आ. प्र. 3/2) अर्थात जिसके सेवन से शरीर में बली (झुर्रियां) पलित (बालों का सफेद होना), खालित्य (गंजापन), कृशता, निर्बलता, वृद्धावस्था और रोग नष्ट हो अथवा इन रोगों का नाश करके आरोग्यपूर्वक शरीर को धारण करें, उसे धातु कहते हैं। Nowadays , लौह एवं धातु दोनों […]

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Ras Shastra Tricks

Parad Bandh (पारद के बंध) with Trick to Learn

पारद के 25 बंध (Parad bandh) का वर्णन आयुर्वेद संहिताओं में मिलता है और उसके अलावा एक विशेष जलुका बंध जो की केवल स्त्री के उपयोग के लिए होता है। आज हम इसे याद करने के लिए ट्रिक बताएंगे जो कि इस प्रकार है :- Trick to Learn :- कल महान काजल दत्त और श्रृंखला […]

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Stree evam Prastuti Tantra

Garb and Garbhini Paricharya (गर्भ एवं गर्भिणी परिचर्या)

(Measures indicated for Embryo & Pregnant lady) पुत्रेष्टियज्ञ का पूर्वकर्म (Measures to be Adopted for Procuring Male Child) आचार्य चरक के अनुसार यदि स्त्री यह अभिलाषा रखती हो कि उसका पुत्र विशालकाय, गौरवर्ण, सिंह जितना ताकतवर, ओजस्वी, पवित्रात्मा और अच्छे मन का हो तो – रजोधर्म के चौथे दिन शुद्ध स्नान के दिन से ही […]

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Swasthavrit Yoga

Vajraasan and Supta Vajraasan ( वज्रासन व सुप्ता वज्रासन )

Vajraasan: *स्थिति-दण्डासन विधि-1. दण्डासन स्थिति में पैरों को लम्बा फैलाए। 3.बायें हाथ से बायें पैर को मोड़कर बायें नितम्ब के पास रखें। एडी बाहर की ओर निकली हुई तथा पन्जा नितम्ब से लगा रहना चाहिए। पैर का तलवा ऊपर की ओर रहना चाहिए। इसी प्रकार दाहिने पैर को मोड़े। घुटने को मिलाकर, उन पर हाथ […]

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Rare collection Sushrut Samhita

Ritucharya As Dincharya : Divisions of Day as per Ritu

क्या आपने भी कभी सोचा था कि हर दिन में 6 ऋतु हो सकती है और उस हिसाब से क्या करना चाहिए इसी बात का उत्तर आचार्य हारीत ने दिया है और प्रतिदिन में षड् ऋतु बताई है आज हम इसे के बारे बात करेंगे। प्राह्ने वर्षा ऋतुं वदन्ति निपुणास्तस्मिन्निशीथे शरत् प्रोक्तः शैशिरिकस्ततो हिमऋतुः सूर्योदयादग्रतः […]

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Plants

Rudraksha / रुद्राक्ष (Elencarpun vermis) : Benefits, Uses

Botanical name = Elencarpun vermis Family = Elaeocarpaceae Vernicular Names:- संस्कृत – रुद्राक्षम्, भूत नाशनम्, शिवाक्षम्, शर्वाक्षम, पावनम्, नीलकंठाक्षम, शिवप्रिया: हिन्दी – रुद्राक, रुद्राक्ष, रुद्राकी English name – Utrasum bead tree of India, India oil fruit उड़िया – रुद्राख्यां कन्नड – रुद्राक्ष गुजराती – रुद्राक्ष तमिल – रुद्राकाई तेलुगु – रुद्राक्ष बंगाली – रुद्राक्याा नेपाली […]

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Rare collection

Max. Time of disease according to Nakshtra ( नक्षत्र व रोग मर्यादा )

हारीत संहिता में नक्षत्र के अनुसार रोग की मर्यादा बताई है कि रोग अगर इस नक्षत्र में होता है तो वह कितने दिन तक चलेगा, यह ही आचार्य रत्न प्रभा ने अपनी चक्रदत्त की टीका में भी बताया है ( 1/292 ) व उसके साथ साथ अष्टांग संग्रह निदान (1/21-33 ) में भी यही वर्णन […]

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Rare collection

Nakshatra and Rog ( विभिन्न रोगों के नक्षत्र )

आयुर्वेद का ज्योतिष शास्त्र के साथ एक गहरा सम्बन्ध है, आचार्यों ने सर्व प्रथम रोगी की आयु जानने के लिए कहा है और विभिन्न आचार्यों ने आयुर्वेद के सामान ही ज्योतिष शास्त्र को फल प्रद कहा है। आज इसी के संभंद में हम आचार्य हारीत की हारीत संहिता में वर्णित रोग व विभिन्न नक्षत्र के […]

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Rare collection

Janpad Vibhakt from Bhel Samhita ( जनपद विभक्त )

जनपद विध्वंश के विषय पर आचार्य चरक ने विमान स्थान के दूसरे अध्याय में बहुत अच्छी प्रकार से व्याख्या की है परन्तु आचार्य भेल ने सूत्र सूत्र स्थान पर वर्णन किया है एक ओर चीज़ जो चरक से बिल्कुल अलग है यह है कि याहा पर भगवान पुनर्वसु ने पांचाल देश में होने वाली महामारी […]

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Agad Tantra

Vish Tantra ( विष तंत्र ) by Acharya Harit ( Harit Samhita )

हर आचार्य की संहिता की अपनी विशेषता होती है आचार्य चरक की चरक संहिता में विष की चिकित्सा के लिए 24 उपकर्मो का वर्णन है परन्तु वहां हमें कोई मंत्र प्राप्त नहीं होता वही जब हम इसके लिए हारीत संहिता का आंकलन करते है तब हमे यहां 4 मंत्र प्राप्त होते वो भी विभिन्न उपयोग […]