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Kumar Bhritya

Pranpratyagman (प्राणप्रत्यागमन) – Resuscitation Process

विभिन्न आचार्यों ने अपने-अपने मत अनुसार अपरा (placenta) गिराने के बाद किए जाने वाले उपयुक्त कार्यों का वर्णन किया है। आचार्य चरक का मत = प्रसूता स्त्री की अपरा गिराने लिए कार्य होने के बाद कुमार लिए निम्नाङ्कित कार्य करने चाहिए। दो पत्थरों के टुकड़े को लेकर बालक के कान के मूल अर्थात् कान के […]

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Astang Hridya Sushrut Samhita

Raktmokshan / Medicinal Leech Therapy in Ayurveda

Raktmokshan / Leech Therapy = सुख से जीवन यापन करने वालों (सुकुमारों) का रक्तस्रावण करने के लिए जोकों का प्रयोग करना चाहिए। त्याज्य जोकों का वर्णन :– जो जोंकें दूषित जल में। अथवा मछली, मेंढक, साँप आदि प्राणियों के शवों की सड़न से अथवा उनके मल-मूत्रमिश्रित कीचड़ में से पैदा होती हैं। जो लाल, सफेद, […]

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Kumar Bhritya

Dantjanmika Adhaya (दंत जन्मिका अध्याय)

दंतोद्भेद काल व उसके लक्षण :- मास उत्पन्न हुए दांत के लक्षण बालक की आयु 4थे मास में उत्पन्न दांत दुर्बल, शीघ्र गिरने वाले, बहुत रोग युक्त हीन आयु 5 वें मास में उत्पन्न हिलने वाले, हर्ष आदि रोग युक्त 6 वें मास में उत्पन्न टेढ़े-मेढ़े, विवर्ण, कीड़ों से खाए हुए 7 वें मास में […]

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Rog Nidan

ज्वर रोग / Jwar rog (Fever) – King of diseases

ज्वर रोग : व्याधि परिचय आयुर्वेद के आचार्यों ने ज्वर (Jwar) को सबसे महत्त्वपूर्ण तथा प्रधान व्याधि माना ज्वर शब्द का प्रयोग रोग के पर्याय के अर्थ में भी किया गया है। ज्वर के प्रधान होने का एक मुख्य कारण यह भी है कि सभी प्राणियों में ज्वर जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त तक कभी न […]

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Ras Shastra

Jarana Sanskar ( जारणा संस्कार ) – Ras Shastra

परिभाषा— पारद में गालन, पातन आदि प्रक्रियाओं के बिना ही बालुका यन्त्र, जारणा यन्त्र आदि यंत्रों के द्वारा गन्धक, अभ्रक, माक्षिक, स्वर्ण, रत्न, आदि द्रव्यों का जारण करने के पश्चात भी पारद के भार या स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं हो, उसे जारणा (Jarana) कहते हैं। Types:- जारणा ⬇ 1)भूचरी 2) खेचरी (रत्नों का जारण) […]

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Dravya Guna Tricks

Trick to Learn Ras Panchak of Non – Detailed Plants

Their are total 148 non detailed plants in B.A.M.S. syllabus but it’s hard to remember them with our trick you can easily learn them.

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Swasthavrit

Dincharya ( दिन चर्या ) : स्वस्थ जीवन के लिए एक आयुर्वेदिक तरीका

दिन का अर्थ है प्रतिदिन और चर्या का अर्थ है आचरण।यहाँ चरण का उल्लेख करते समय यह भी कहा गया है कि आचाराल्लभते आयुः । अर्थात आचार से आयु प्राप्त होती है। निरुक्ती :- प्रतिदिन कर्तव्या चर्या दिनचर्या। प्रतिदिन करने योग्य चर्या दिनचर्या कहलाती है।आचार शब्द से आहार व विहार दोनों का ग्रहण होता है […]

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Dravya Guna Plants

Tulsi – Ocimum sanctum Comparitive Review

Botanical name- Ocimum Sanctum Family- Lamiaceae English name- Holy basil हिन्दी – तुलसी, वृंदा तेलेगु – गग्गेर चेट्टू तमिल – तुलशी अरबी – दोहश Understanding Tulsi Types in Nighantus :- Comparitive Review Name :- Name Madanpal Dhanvantri Raj Kaidev Chandu Bhav Prakash तुलसी * * * * * सुरसा * * * * * गौरी […]

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Author Special Practice

Coronavirus (COVID-19) : Ayurvedic Analysis and Prevention

Amid all the gloom spread across the world, due to the outbreak of novel Coronavirus (COVID-19), which has now infected more than 8 lacs and killed nearly 43 thousand individuals around the world. And is expected to kill around 15-16 Lacs in the coming future. Today, COVID-19 has hit the world, maybe some other day […]

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Ras Shastra

Kankushth ( कंकुष्ठ ) Ruhbarb : Upras Varg

नाम:- संस्कृत कड्कुष्ठम् हिंदी कंकुष्ठ english Gambose tree (ruhbarb) latin Garcinia morella पर्याय:- तालकुष्ठ, रेचक, हेमवती, काककंकुष्ठ। Habitat:- Singapore, Malaysia, Indonesia. Types:- 2 प्रकार:- (1) नलिका कंकुष्ठ (2) रेणुक कंकुष्ठ (1) नलिका कंकुष्ठः– पीतवर्ण, चमकदार, स्निग्ध, भारी श्रेष्ठ होता है। (2) रेणुक कंकुष्ठः– यह श्यामपीतवर्ण, लघु, नि:सत्व एवं अनुपयोगी होता है। कंकुष्ठ शोधनः- कंकुष्ठ में […]