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Swasthavrit

ऋतु सन्धि (Ritu sandhi), ऋतु हरितकी व ऋतु विपर्यय

परिभाषा: ऋत्वोरन्त्यादिसप्ताहावृतुसन्धिरिति स्मृतः। (अ.ह. सू. 4/15)दो ऋतु के जोड़ को ऋतु संधि कहते है। वर्तमान ऋतु का अन्तिम सप्ताह और आने वाली ऋतु का प्रथम सप्ताह अर्थात यह चौदह दिन (14 दिन) का समय ऋतु संधि है। ऋतु सन्धि चर्या :तत्रपूर्वो विधिस्त्याज्यः सेवनीयोऽपरः क्रमात्। असात्म्यजा हि रोगाः स्युः सहसा त्यागशीलनात्।। (अ.इ.सू. 4/6)ऋतु सन्धि में वर्तमान […]

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Dravya Guna Plants

Guduchi – Tinospora cordifolia Comparitive Review

Botanical name- Tinospora cordifolia Family- Menispermaceae हिंदी – गिलोय, गुरूच, गुडुची उड़िया – गुलंचा कन्नड़ – अमृतवल्ली, युगानी वल्ली गुजराती – गुलवेल तमिल – अमृदवल्ली Comparitive Review Name :- Name Madanpal  Dhanvantri  Raj Nighantu Kaidev Bhav Prakash गुडूची * * * * * कुण्डली * * * * * छिन्ना * * * * * […]

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Dravya Guna Plants

Ashvagandha / अश्वगंधा : Comparative Review

Botanical name- Withania somnifera Family– Solanaceae English name- Winter cherry संस्कृत – वराहकर्णी, वरदा, बलदा, कुष्ठगंधिनी हिंदी – असगंध, पुनीर, नागोरी असगंध तमिल – चुवदिग, अमुक्किरा, अमकुलंग तेलुगू – आंड्रा कन्नड़ – अमन गुरा Classical Mentions :- चरक संहिता – बल्य, बृहंण, मधुर स्कंदभाव प्रकाश निघंटु – गुडूचयादि वर्गमदनपाल निघंटु – अभयादि वर्गधनवंत्रि निघंटु – […]

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Yog ( Formulations )

Brihat Pipalayadi Tail (बृहत्पिप्पल्यादि तैल) : Medicine

पिप्पली मुस्तकं धान्यं सैन्धवं त्रिफला वचा। यवानी चाजमोदा च चन्दनं पुष्कराह्वयम्॥ शटी द्राक्षा गवाक्षी च शालिपर्णी त्रिकण्टकम्। भूनिम्बारिष्टपत्राणि महानिम्बं निदिग्धिका। गुडूची पृश्निपणी च वृहती दन्तिचित्रकौ। दावीं हरिद्रा वृक्षाम्लं पर्पटं गजपिप्पली॥ एतेषां कार्षिकैः कल्कैः तैलप्रस्थं विपाचयेत्। दधिकाञ्जिकतक्रैश्च मातुलुङ्गरसैस्तथा। स्नेहमात्रासमैरेभिश्शनैर्मद्वाग्निना पचेत्। सिद्धमेतत्प्रयोक्तव्यं जीर्णचरमपोहति॥ एकजं द्वन्द्वजं चैव दोषत्रयसमुद्भवम्। सन्ततं सततान्येधुस्तुतीयकचतुर्थकान्। मासजं पक्षजं चैव चिरकालानुबन्धिनम्। सर्वांस्तान्नाशयत्याशु पिप्पल्याद्यमिदं महत्॥ ( […]

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Swasthavrit Yoga

Surya Namaskar (सूर्य नमस्कार) – Sun Salutation

“तं विद्यात् दुःख संयोगो वियोगं योग संजितम्। ” (भगवद्गीता) 6/23।। सभी प्रकार के (शारीरिक एवं मानसिक) वेदना के सम्बन्ध से विमुक्त होना ही योग कहलाता है। ◆ जब पुरुष अपने मन, बुद्धि , इन्द्रियों की चंचलता को स्थिर कर लेता है, तब वह व्यक्ति इस संसार के व्यामोह से उत्पन्न होने वाले सभी प्रकार के […]

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Swasthavrit Yoga

Bhujangasana (भुजंगासन / सर्पासन ) -Cobra pose

फन उठाये हुए कृष्णसर्प के समान आकृति बनने से इसे भुजङ्गासन या सर्पासन कहा गया है। स्थिति- अधोमुख तानासन। विधि :– 1.पेट के बल लेट कर, हाथ और पैर लम्बे करके जमीन पर टिका हुये रहे। 2. पश्चात् दोनों हाथों की कुहनियाँ को मोड़कर अंगुलियों को कन्धे के पास रखें। 3 .धीरे-धीरे ठुड्डी को ऊपर उठाते […]

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Swasthavrit Yoga

Gomukhasana ( गोमुखासन )- Cow’s Face Pose

इस आसन में आसनाभ्यासी का शरीर गाय मुख सदृश लगने लगता है अत: इसको गोमुखासन (Cow’s face posture) कहते हैं। विधि :- ★दोनों पैरों को सामने की तरफ फैला कर बैठ जाते हैं फिर बायें पैर को मोड़कर इस प्रकार रखते हैं कि बायें पैर की ऐडी दायीं नितम्ब के नीचे आ जाय। ★ पुनः […]

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Swasthavrit Yoga

Matsyasna ( मतस्यासन् ) – Fish Pose, its indications

◆शरीर मछली की भाँति जल में तैरने से ही इसे मत्स्यासन कहा गया है। स्थिति – उत्तान तानासन। विधि ;– 1, उतान ताड़ासन की स्थिति से। 2. दाहिने पैर को बायीं जाँघ पर और बाएँ पैर को दाहिनी जाँघ पर रखें इस प्रकार यहाँ पद्मासन जैसी स्थिति बन जाती है। 3 .दोनों हाथों से सहारा […]

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Charak Samhita

जनपदोद्ध्वंसनीय / Janpadodvansniya Charak samhita – Viman sthan

जनपदोद्ध्वंसनीय अध्याय:- एक बार भगवान् पुनर्वसु शिष्यों सहित जनपद मण्डल के पाञ्चालक्षेत्र में श्रेष्ठ द्विजातियों (ब्राह्मण-क्षत्रिय-वैश्य) की आवासनगरी काम्पिल्य नामक राजधानी में गंगातटवर्ती वन्यप्रदेशों में घूमते हुए आषाढ़ मास में अपने शिष्य अग्निवेश से कहने लगे :- महामारी फैलने से पहले औषधियों का संग्रह करने का निर्देश :- अस्वाभाविक रूप में स्थित नक्षत्र, ग्रह, चंद्रमा, […]

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Yog ( Formulations )

Eladi Churna (एलादि चूर्ण) : Medicine, विधि व उपयोग

एलात्वक्पत्र नागामरिचमगधजानागरं कुन्दुरुष्कं तक्कोलं कोष्ठजातीफलममृतलतासारभूनिम्बवासाः। यष्टिद्राक्षाकचोरं मलयजखदिरं क्षीरवारं प्रियंगुः ह्रीबेरं धान्यजातीशतकुसुमवचाभाङ्गिमुस्ताश्च तिक्तम्॥ सर्वं सम्यक्सुचूर्णं समसितसहितं श्लेष्मपित्तज्वरनं पित्तं वै पाण्डुरोगान् क्षयमदगुदजारोचकागुल्मजीर्णम्। हन्तिश्वासादिहिक्काज्वरजठरमहाकासहद्रोगनाशं एलाद्यं योगराजं सकलजनहितं भाषितं पूज्यपादैः॥ ( बसवराजीयम् 1 प्रकरणम् ) द्रव्य :- एला, त्वक्, पत्र, नागकेशर, मरिच, पिप्पली,‌ शुण्ठी, कुंदरु, कङ्कोल, कुष्ठ, जातीजल, गुडूची सत्व, भूनिंब, वासा, मधुयष्टि, द्राक्षा, कर्चुर, श्वेत चंदन, खादिर, क्षीरवार, […]