Caesarean section, indications, contraindications, types, procedure
Episiotomy, its types, indications, contraindications, procedure
Oxytocics are the drugs of varying chemical nature that have the power to excite the contractions of the Uterine muscles. The important ones:- Oxytocin Ergot derivatives Prostaglandins Oxytocin Oxytocin has a duration of action of approximately 20 minutes. Oxytocin loses its effectiveness unless preserved at correct temperature (2-8 degree Celsius). ◾Preparations used: Synthetic oxytocin Syntometrine […]
Fetal Membranes, amnion, Chorion, amniotic fluid
Intrauterine growth restriction, its etiology, clinical features, diagnosis, types and management
मूत्रष्टक और क्षीराष्टक गण मूत्र के रस मूत्र के गुण दुग्ध के रस दुग्ध के गुण अवि तिक्त स्निग्ध पित अविरोधि मधुर,लवण अश्मरी नाशक अजा मधुर ,कषाय पथ्य,दोषनाशक कषाय ,मधुर रस ग्राही कर्म गो मधुर क्रिमी, कुष्ठ नाशक मधुर रस जीवनीय, बल्य महिष मधुर अर्श,शोफ,उदर रोग नाशक अधिक मधुर,शीतल निद्रकारक,अभिष्यंदी हथिनी लवण क्रिमी, कुष्ठ हितकर […]
पर्याय :- मधु, माक्षिक, माधवीक,क्षोद्र सारघ, माध्वीक, वरटी वांत। गुण :- शीत, लघु, स्वादिष्ट, रुक्ष, ग्राही, नेत्र हितकर, अग्नि वर्धक, स्वर हितकर, व्रण शोधक व रोपक, सुकुमार कारक, सूक्ष्म, स्रोतस शोधक, मधुर कषाय रस युक्त, वर्ण कारक, मेद्य, वृष्य, विश्द, रोचक, योगवाही, वातकारक, कुष्ठ, अर्श, कास, पित्त कफ शामक, प्रमेह, कलांती, कृमि, मेद, तृष्णा, वमन, […]
इक्षु के भेद ट्रीक :- पर्याय :- इक्षु, असिपत्र, गुढमल, मधचतृण, भूरिरस, दी्घच्छदगुण :- रस मधुर, मधुर विपाक, स्निग्ध,गुरु, शीत वीर्य, रक्तपित्त शामक, बलकारक, वृष्य, कफकारक, मूत्रकारक भेद :- 13 पांडव वंश के भीम ने शत वर्ष पहले नेपाल के नील कौशिक और मनोगुप्त के दीर्घ सूची पत्र में लिखे कांड को कंतार में टपका […]
Bleeding from or into the Genital tract after the 28th week of pregnancy but before the birth of the baby. Causes of Antepartum Haemorrhage Placenta previa When the placenta is implanted partially or completely over lower Uterine segment. Etiology- The exact cause is unknown, but following theories may explain- Dropping down theory- The fertilized ovum […]
लघु पंचमूल :- बाहर खड़ी गो के कण्ठ में पर्णी। बाहर – बृहतीगो – गोक्षुरकण्ठ – कण्टकारीपर्णी – शालपर्णी व पृश्नपर्णी बृहत पंचमूल :- पाटलिपुत्र में शयोनाक नामक सर्प के बिल पर अग्नि लगने से गम्भीर हो गया। पाटलिपुत्र – पाटलाशयोनाक – शयोनाकबिल – बिल्वअग्नि – अग्निमंथगम्भीर – गंभारी वल्ली पंचमूल :- मेष राशि की […]