History :- मृत संजीवनी विद्या की शुरूवात भगवान शिव से हुई थी उन्होंने इस विद्या का उपयोग अपने पुत्र श्री गणेश पर किया था। जब वह लड़ाई में उनका शिर कट गया था तब उनके सिर पर गज राज का मस्तक लगाया था। उन्होंने इस विद्या को दैत्य गुरु शुक्राचार्य को दिया था (शिव जी […]
Botanical Name :- Piper longumFamily Name :- Piperaceae Verniculer Names :- हिंदी :- पीपली, पीपर उर्दू :- पिपल उड़िया :- बैदेही कोंकणी :- पीपली कन्नड़ :- हिप्पलीगुजराती :- पीपर, पिपरिमूलतेलुगु :- पिप्पलु तमिल :- तिपिली, पिप्पाली, Foreign Names :- English :- Indian long pepper, Dried catkins Arabian :- Darfulful, DalfilfilRoman :- Filfil daraz, Pipal daraz […]
रसगंधचत्रिकटुकं ग्रन्थिकं चव्यचित्रकम्। अमृतं लवणं तुल्यं भृङ्गस्वरसमर्दितम्॥ गुञ्जामात्राश्च वटिकाः पञ्चकासान्विनाशयेत्। अमृताङ्करसो नान्मा विंशतिश्लेष्मरोगजित्। अशीतिवातरोगांश्च नाशयेन्नात्र संशयः॥ Ingredients :- पारद, गंधक, त्रिकटु ( सोठ, मरीच, पीपली), ग्रंथि, चव्य, चित्रक, अमृत ( वत्सनाभ ), लवन ( संध्व ) सभी द्रव्यो को सम मात्रा में ले। Bhawna dravaya :- भृङ्गराज स्वरस Vidhi :- सभी द्रव्यो को चूर्ण करके […]
Parad ( पारद ) / Mercury : Ras
रसशास्त्र में रस शब्द से पारद (Parad) का ही ग्रहण किया जाता है। संस्कृत – पारदः हिंदी – पारा English – Mercury Latin – Hydrargirum Melting point= ( -35.87℃) Freezing point= (-)36℃ Atomic no.= 80 Mass no.= 200 Synonyms :- रस रसेन्द्र सूत पारद मिश्रक निरुक्ति :- 1. रस :- स्वर्णादि सभी धातुओं एवं अभ्रकादि […]
शुद्धसूतं समं गन्दं मृतशुल्वं तयोः समम्। अभ्रलोहकयोर्भस्म कान्तभस्म सुवर्णजम्॥ राजतं च विषं सम्यक् पृथक्सूतसमं भवेत्। हंसपादीरसैमा दिनमेकं वटीकृतम्॥ काचकूप्यां विनिक्षिप्य मृदा संलेपयेदहिः। शुष्का सा वालुकायन्त्रे शनैर्मूद्ग्निना पचेत्॥ चतुर्गुञ्जामितं देयं पिप्पल्याद्रवेण तु॥ क्षयं त्रिदोषजं हन्ति सन्निपातांस्त्रयोदश। आमवातं धनुर्वातं शृङ्खलावातमेव च। आढ्यवातं पङ्गवातं कफवाताग्निमान्द्यनुत्। कटुवातं सर्वशूलं नाशयेन्नात्र संशयः॥ गुल्मशूलमुदावर्त ग्रहणीमतिदुस्तराम्। प्रमेहमुदरं सर्वामश्मरी मूत्रविग्रहम्॥ भगन्दरं सर्वकुष्ठं विद्रधिं महतीं […]
Prameh ( प्रमेह ) : Diabetes
मेदोवह स्रोतस की दुष्टी ही प्रमेह उत्पन करती है। मेदोवह स्त्रोतस परिचय-मेद धातु का वहन करने वाले स्रोत को मेदोवह स्रोतस कहते हैं। मेदोवह स्त्रोतस का प्राकृत कर्म– शरीर में स्नेहन, स्वेदन तथा शरीर को दृढ़ता प्रदान करना है।विकृत कर्म- प्रमेह विकृत होने पर स्थौल्यादि विकारों की उत्पत्ति होती है। मेदोवह स्रोतो दुष्टी के कारण– […]
AFTER READING SWASKUTHAR RAS, READ LAGHUSUTSHEKHAR RAS. रसो गन्धो विष चैव टंकणं च मन: शिला ꫰ एतानी टंकमात्राणि मरिचं चाष्टटंकम् ꫰꫰ एकैकं मरिचं दत्वा खल्वे सूक्ष्मं विमर्दयत् । त्रिकुट टंकमात्र च दत्वा पश्चादिव् चूर्णचेत् ꫰꫰ सर्वमेकत्र संयोज्य काककूप्या विनिक्षिपेत् ꫰꫰ घटक द्रव्य :- शुद्घ पारद – 1 भाग पिप्पली – 1 भाग शुद्घ गंधक – […]
AFTER READING NAVNEET VARG, READ TAIL VARG. नवनीत कर्म व गुण गाय गाय का मक्खन हितकारी, वृत्ति, वर्ण को श्रेष्ठ करने वाला बलकारक, अग्नि प्रदीपक और यही वात, पित्त, रक्त विकार क्षय बवासीर लकवा और स्वाति को नष्ट करता है। यह बालक और वृद्धों के लिए हितकारी है। बच्चों के लिए तो अमृत समान है। […]
AFTER READING LAGHUSUTSHEKHAR RAS, READ SWASKUTHAR RAS. Ingredients :- शुण्ठी चूर्ण – १ भाग शुद्ध स्वर्ण गैरिक – २ भाग भावना द्रव्य :- नागवल्ली स्वरस (आवश्यकता अनुसार ) विधि / Vidhi :- स्वर्ण गैरिक के सूक्ष्म चूर्ण को गौ घृत मे भ्रजन करें ꫰ भ्रजन करने के पश्चात् उसे ठंडा होने दें ꫰ शुण्ठी का […]
इसमें शूक धान्य (Shukh Dhanya) और शमी धान्य (Shami Dhanya) का वर्णन दिया गया है। शूकधान्यवर्ग (Shukh Dhanya) :- महाशालि कलम (जो उखाड़ कर पुनः प्रतिरोपित जाता है, जैसे रोपा धान) शकुनाहृत तूर्णक दीर्घशूक गौर धान्य (गौरिया) पाण्डुक,पाल सुगन्धिक (बासमती) लोहवाल सारिका प्रमोदक पतंग तथा जपनीय रक्तशाली (लाल धान) ● ये सभी प्रकार के चावल […]
